Ram Navami 2021 Date, Time – राम नवमी पूजन सामग्री, पूजा विधि एवं श्रीराम जन्म स्तुति

Ram Navami – रामनवमी हिंदुओं का प्रमुख त्योहार हैं। हिन्दू मान्यता के अनुसार चैत्र मास की नवमी तिथि को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्म उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में हुआ था। इसीलिए यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान श्रीराम के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है।

उनका जन्म नवमी तिथि को हुआ था इसी कारण से इस दिन को हम राम नवमी कहते हैं| रामनवमी के दिन भगवान श्री राम और भगवान सूर्य की पूजा होती है, भगवान श्री राम को सूर्य के वंशज का माना जाता हैं| इसलिए उस दिन भगवान सूर्य की पूजा का विधान हैं |भक्त इस दिन अपने आराध्य श्री राम की पूजा अर्चना करते हैं, और हर तरफ भगवान् श्री राम की जय जयकार होती है. लोग चौपाईया गाते हैं. जो की इस प्रकार है ‘भये प्रकट कृपाला दीन दयाला…’ और इस चौपाई को मैंने नीचे लिखा भी हैं |इस दिन अयोध्या में विशेष पूजा अर्चना भी होती है जिसे देखने के लिए देश – विदेश से लाखो करोड़ो भक़्त एकत्रीत होते हैं और भगवान श्रीं राम की पूजा अर्चना करते है। श्रदालुगण प्रातः काल से ही सरयू नदी के तट पर पूजा अर्चना कर कर भगवान के भजन में लग जाते हैं

हम आशा करते है की रामनवमी २०२१ को इस साल बहुत ही धूम -धाम से मनाया जायेगा |

वैसे अयोध्या में सबसे धूम धाम से भगवान की जन्म को अभी तक वहा का प्रसिद्ध कनक भवन मंदिर मनाता आया है | पूजा अर्चना भगवान के चौपाई से शुरू होती है और सभी श्रद्धालुगण भरपूर आनंद लेते हैं |इस अवसर पर सभी नर – नारी सोहर गाते है और पूजा अर्चना कर कर प्रसाद वितरण करते है और प्रसाद ग्रहण भी करते हैं |

राम जन्म की कथा

भगवान श्री राम का जन्म अयोध्या में हुआ जब अयोध्या के राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया और यज्ञ से प्राप्त खीर को अपनी प्रिय पत्नी कौशल्या को दे दिया। माता कौशल्या ने खीर का आधा हिस्सा कैकेयी को दिया इसके बाद दोनों ने अपने हिस्से से आधा-आधा खीर तीसरी पत्नी सुमित्रा को दे दिया। इस खीर के सेवन से चैत्र शुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र एवं कर्क लग्न में माता कौशल्या की कोख से भगवान श्री राम का जन्म हुआ । इसी तरह कैकेयी से भरत तो सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया।

Ram Navami 2021 Date, Time (Muhurat)- Ram Navami kab hai?

Ram Navami 2021 Date – रामनवमी 202121 अप्रैल, 2021 (बुधवार)
रामनवमी मुहूर्त:11:02:08 से 13:38:08 तक
अवधि:2 घंटे 36 मिनट
रामनवमी मध्याह्न समय:12:20:09

रामनवमी पूजन सामग्री

धूप बत्ती (अगरबत्ती)(बड़, गूलर, पीपल, आम और पाकर के पत्ते)
कपूरपंचामृत
केसरतुलसी दल
चंदन  केले के पत्ते
यज्ञोपवीत 5(यदि उपलब्ध हों तो खंभे सहित)
कुंकुऔषधि
चावल(जटामॉसी, शिलाजीत आदि)
अबीरश्री सत्यनारायणजी का पाना
गुलाल, अभ्रक(अथवा मूर्ति)
हल्दीगणेशजी की मूर्ति
आभूषणअम्बिका की मूर्ति
नाड़ासत्यनारायण को अर्पित करने हेतु वस्त्र
रुईगणेशजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र अम्बिका को अर्पित करने हेतु वस्त्र
रोली, सिंदूरजल कलश (तांबे या मिट्टी का)
सुपारी, पान के पत्तेसफेद कपड़ा (आधा मीटर)
पुष्पमाला, कमलगट्टेलाल कपड़ा (आधा मीटर)
धनिया खड़ा सप्तमृत्तिकापंच रत्न (सामर्थ्य अनुसार)
सप्तधान्यदीपक
कुशा व दूर्वाबड़े दीपक के लिए तेल
पंच मेवाबन्दनवार
गंगाजलताम्बूल (लौंग लगा पान का बीड़ा) श्रीफल (नारियल)
शहद (मधु)धान्य (चावल, गेहूँ)
शकरपुष्प (गुलाब एवं लाल कमल)
घृत (शुद्ध घी)एक नई थैली में हल्दी की गाँठ,
दहीखड़ा धनिया व दूर्वा आदि
दूधअर्घ्य पात्र सहित अन्य सभी पात्र
ऋतुफलइत्र की शीशी
नैवेद्य या मिष्ठान्नसिंहासन (चौकी, आसन)
(पेड़ा, मालपुए इत्यादि) इलायची (छोटी)पंच पल्लव
लौंग मौली 

राम नवमी पूजा विधि – Ram Navami Puja Vidhi

इस दिन प्रात:कल में स्नान इत्यादि से निवृत हो कर भगवान श्री राम का स्मरण करते हुए भक्त लोग व्रत एवं उपवास का पालन करते हैं। रामनवमी वाले दिन भगवान श्री राम के साथ हनुमान की भी पूजा होती है और लोग आपने आपने घरो में हनूमान जी का पताका (लाल कपड़े से बना हुआ झंडा ) लगते हैं |

  • पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था इसी कारण इस दिन तीसरे प्रहर तक व्रत रखा जाता है और दोपहर में श्री राम की पूजा अर्चना की जाती है और घरों के ऊपर पताका लगाया जाता है|
  • पौराणिक मान्यता यह भी है कि यदि इस दिन व्रत रख कर रामचरितमानस कथा का पाठ करते है तो भगवान आपको सब सुख समृद्धि से सम्पन करेंगे |
  • भगवान श्रीराम का भजन, पूजन, कीर्तन आदि करने के बाद प्रसाद को पंचामृत सहित श्रद्धालुओं में वितरित करने के बाद व्रत खोलने का विधान है इसके साथ हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए

श्रीराम जन्म स्तुति

भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी,
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।

लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी,
भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी।

कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता,
माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनंता।

करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता,
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयौ प्रकट श्रीकंता।

ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै,
मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै।

उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै,
कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।

माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा,
कीजे सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा।

सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा,
यह चरित जे गावहि हरिपद पावहि ते न परहिं भवकूपा।

बिप्र धेनु सुर संत हित, लीन्ह मनुज अवतार।
निज इच्छा निर्मित तनु, माया गुन गो पार।।

चैत्रशुक्ला तु नवमी, पुनर्वसुयुता यदि, सैव मध्याह्नयोगेन, महापुण्यतमा भवेद्। पुनर्वसुसमायुक्ता, सा तिथि: सवर्कामदा।।

अर्थात् चैत्र शुक्ल नवमी यदि पुनर्वसु नक्षत्र से युक्त हो और मध्याह्न में भी वही योग हो तो वह परम पुण्यप्रदान करने वाली होती है।

राम नवमी के बारे में रोचक तथ्य – Some Important facts about Ram Navami

  • राम नवमी हिन्दुओं का एक प्रसिद्द त्यौहार है। यह धार्मिक और पारम्परिक त्यौहार है, जो हिन्दुओं के द्वारा पूरे उत्साह के साथ प्रति वर्ष मनाया जाता है।
  • यह त्यौहार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी (9वें दिन) तिथि को मनाया जाता है।
  • हजारों श्रद्धालुओं के द्वारा अयोध्या (उत्तर प्रदेश), सीतामढ़ी (बिहार), रामेश्वरम (तमिलनाडु), भद्राचलम (आंध्रप्रदेश) आदि स्थलों पर राम नवमी के भव्य समारोह का आयोजन किया जाता है।
  • कुछ भक्तगण रामनवमी के दिन हनुमान जी की भी पूजा करते है और केसरिया ध्वजा आपने घरो में लगते हैं
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